मंगलवार, 21 जुलाई 2009

पोंगा पंडित

पोंगे पंडित उल्टा सीधा बोल रहे हें ....................... । डर के दरवाजे जनता पे खोल रहे हें ....... उनकी बातें किसी का कब कल्याण करेंगी ... । अपने पैसों की जो तकड़ी तोल रहे हें ... । उन कमजोर दिलों पे इन का जोर चले हे ॥ । जिन के मन अंदर ही अंदर डोळ रहे हे .... । ज्योतिष विद्या अपने आप में गलत नही .... । गलत तो वो हें जो इस में विष् घोल रहे हें ... । कुदरत के इस खेल को उपर वाला ही जाने ... । उसकी नजर में :अंजुम:हम अनमोल रहे हें

मंगलवार, 14 जुलाई 2009

मेरी मदद तो करो यारो क्या यह सच नही ?

चार वेद हर देश के हर व्यक्ति के कर्मों को किस प्रकार किया जाए बताते हें तथा पांचवां वेद जिस का कोई अस्तित्व नही हे परन्तु इन्ही चारों वेदों में यह हे इस को यदि देखा जावे तो हर धर्म जो सनातन धर्म से जुड़ाहुआ हे {जुदा नही हे }इसी पांचवें वेद का अनुसरण करते हें जेसे हिंदू ,मुस्लिम,सिख,इसाई ,चारों धर्म आपस में छोटे बडे भाई हो कर भी एक ही समान होते हें क्या इन चारों धर्मों ने कभी किसी को चोरी करने /व्यभिचार करने /झूठ बोलने /इर्षा करने /एक दुसरे से राग द्वेष रखने /गरीब कमजोर पर अत्या चार करने की शक्षा दी हे क्या इनमे से कोई किसी को गुमराह करना ,बचों बूढों ओरतों निह्थों और बेसहारा अनाथो को तंग करने या मारने की आज्ञा देता हे ?क्या इन्हों ने कभी किसी मनुष्य जीव प्राणी की रक्षा मदद करने से रो का हे जरा आज अपने आप में झांकें की हम चारों धर्म कहाँखडे हें --क्या हम सनातन से जुड़े हें या जुदा हें जो जुदा हे वो सनातन का केसे हो सकता हे ?जो जुडा हे वही सनातन धर्म का अनुसरण करता हे ऐसा व्यक्तित्व तो एक ही नजर आता हे जो उपरोक्त चारों धर्मों में देखा जा सकता हे सभी उसे भगत संत या फकीर के रूप में जानते हें

शनिवार, 18 अप्रैल 2009

सनातन पुरूष ईश्वर को कहा हे ,ईश्वर के धर्म को ही सनातन धर्म कहा जाता हे इश्वर का धर्म बिना किसी से भेद-भाव किए उस की हर जरूरत को पुरा करना होता हे वह हमारे प्रभु सब से शक्ति वाले होने से शक्तिवान ,अतिसुन्दर होने से रूपवान ,गुणों की खान होने से गुणवान ,रहमदिल होने से दयावान ,ऐश्वर्यवान ,हे इन्ही के आधार पर हमारी सभी जरूरतों को पुरा करने हेतु उन्हों ने हमेर लिए चार वेदों की रचनाकी ,जिस प्रकार किसी उपकरण को चलाने के लिए उसके साथ एक पस्तक मिलित हे और हम उस के निर्देशों को पड़ कर उस उपकरण का सदुपयोग करलेते हे उसी प्रकार अपने इस अमुल्यवान जन्म को केसे सफल बनावें जानने को इन चरों वेदों की शरण ग्रहण करनी पडती हे चरों वेदों का एक ही कथन हे की उसी इश्वर की शरण ग्रहण करो इस नियम को यदि सत्य मन जाए तो वेद मनुष्य के गुरु मने जायेगे इस वेद गुरु के द्वारा दींगई आज्ञाओं का पालन कर के मनुष्य सफल होजाता हे इसके उदाहरणों से हमारी पवित्र पुस्तके भरीं पडी हे सनातन धर्म के अनुरूप ही चरों धर्मों की प्वुत्र पुस्तकें परमात्मा ने रचीं १ हिंदू २मुस्लिम ३ सिख ४ इसाई ,पंचम वेद की रचना इन्ही चरों धर्मों की पवित्र पुस्तकों में निहित हे उन आज्ञाओं का जो पालन करते हे ,उन को फकीर कहा जाता हे फकीर ही एक मात्र ऐसा मनुष्य हे जो न हिंदू ,न मुसलमान ,न सिख और नाही इसाई ही होता हे और इन सभी धर्मों में पाया जाता हे इन फकीरों में एक समान फिक्र -फाका और सिदक के गुन भरे होते हे मनुष्यों में नही फिर मनुष्य को गुरु और फकीर केसे माना जा सकता हे?????????????????????///////////////////////
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